बैंगन (Solanum melongena L.) उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण सोलेनेसियस फसल है। 'बैंगन' नाम भारतीय उपमहाद्वीप में लोकप्रिय है और यह अरबी एवं संस्कृत से लिया गया है। वहीं, 'एगप्लांट' (Eggplant) नाम कुछ किस्मों के फल के आकार से आया है, जो सफेद होते हैं और मुर्गी के अंडे के समान दिखते हैं। इसमें कैलोरी और वसा कम होती है और इसमें मुख्य रूप से पानी, कुछ मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। यह खनिजों और विटामिनों का एक अच्छा स्रोत है।
भारत में, यह उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों को छोड़कर पूरे देश में उगाई जाने वाली सबसे आम और प्रमुख सब्जी फसलों में से एक है। पहाड़ी क्षेत्रों में यह केवल गर्मियों में उगाई जाती है। यह एक बहुमुखी फसल है जो विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुकूल है और पूरे वर्ष उगाई जा सकती है। व्यावसायिक रूप से इसे वार्षिक फसल के रूप में उगाया जाता है।
मिट्टी और जलवायु: हालांकि बैंगन सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन आमतौर पर जल निकासी वाली गाद-दोमट और चिकनी-दोमट मिट्टी को प्राथमिकता दी जाती है। मिट्टी गहरी और उपजाऊ होनी चाहिए। बेहतर विकास के लिए 5.5 से 6.0 का मिट्टी पीएच (pH) अच्छा है। बैंगन को वृद्धि और फल पकने के दौरान लंबे और गर्म मौसम की आवश्यकता होती है। इष्टतम तापमान 20-30 डिग्री सेल्सियस है।
मौसम: हालांकि इसे पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, लेकिन बुवाई के लिए जून-जुलाई, अक्टूबर-नवंबर और जनवरी-फरवरी (दक्षिण भारतीय परिस्थितियों में) उपयुक्त महीने हैं। भारत के उत्तरी मैदानों में मुख्य रूप से दो बुवाई (शरद-सर्दियों और वसंत) की जाती है। मध्य और दक्षिण भारत में बुवाई का समय जुलाई-अगस्त और दिसंबर-जनवरी है।
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